सदर तहसील में लेखपालों को स्पष्ट निर्देश – कोई पात्र किसान न छूटे, आय-जाति-निवास, फॉर्मर रजिस्ट्री व किसान दुर्घटना बीमा में भी शत-प्रतिशत प्रगति सुनिश्चित करें

गोरखपुर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ अन्य किसान हितैषी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने सदर तहसील सभागार में एक विस्तृत और गंभीर समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने गांव-वार लेखपालों से सीधा संवाद करते हुए स्पष्ट कर दिया कि पात्र किसानों को किसी भी स्थिति में योजनाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।
जिलाधिकारी ने एक-एक लेखपाल से उनके क्षेत्र की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि कितने किसानों को किसान सम्मान निधि की किस्त नियमित मिल रही है, किन किसानों को नहीं मिल रही है और यदि भुगतान लंबित है तो उसके पीछे क्या कारण हैं। ई-केवाईसी, आधार सीडिंग, बैंक खाते की त्रुटि, भू-अभिलेख में विसंगति या आयकर रिटर्न दाखिल करने जैसे बिंदुओं पर उन्होंने स्पष्ट रिपोर्ट तलब की।
डीएम ने सख्त लहजे में कहा कि लेखपाल गांव स्तर पर प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। आपकी रिपोर्ट और सत्यापन पर ही योजनाओं की सफलता निर्भर करती है। यदि किसी पात्र किसान का नाम छूटता है तो उसकी जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन किसानों की किस्त तकनीकी कारणों से रुकी है, उनके मामलों का तत्काल समाधान कराया जाए और साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
बैठक में फॉर्मर रजिस्ट्री (किसान पंजीकरण) की स्थिति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। डीएम ने निर्देश दिया कि प्रत्येक पात्र किसान का फॉर्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि भविष्य की अधिकांश योजनाओं का लाभ इसी डाटा बेस के आधार पर दिया जाएगा, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर मानी जाएगी। लेखपालों को गांव-गांव जाकर पंजीकरण की स्थिति की जांच करने और छूटे किसानों का तत्काल पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए।
किसान दुर्घटना बीमा योजना की भी समीक्षा बैठक में प्रमुखता से की गई। जिलाधिकारी ने पूछा कि कितने किसानों को दुर्घटना बीमा का लाभ मिला, कितने प्रकरण लंबित हैं और लंबित मामलों में देरी का कारण क्या है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में पात्र परिवार को समय से सहायता मिलनी चाहिए। इसमें अनावश्यक विलंब या कागजी त्रुटि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीएम ने लेखपालों के व्यापक दायित्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसान सम्मान निधि के अतिरिक्त आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जारी करना, भूमि अभिलेखों का संधारण, खतौनी का अद्यतनकरण, नामांतरण, बंटवारा, फसल गिरदावरी, राजस्व वसूली तथा विभिन्न योजनाओं का सत्यापन भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों में देरी से छात्रवृत्ति, पेंशन और अन्य योजनाएं प्रभावित होती हैं, इसलिए इनका निस्तारण समय सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए।
भूमि अभिलेखों में पारदर्शिता पर जोर देते हुए डीएम ने कहा कि खतौनी में त्रुटियां कई योजनाओं के लाभ में बाधा बनती हैं। नामांतरण और अन्य प्रविष्टियों को समय से दर्ज करना सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो उसका त्वरित समाधान किया जाए।
बैठक में एसडीएम सदर दीपक गुप्ता एवं डिप्टी कलेक्टर/तहसीलदार सदर ज्ञान प्रताप सिंह ने क्षेत्रवार प्रगति की जानकारी दी। नायब तहसीलदार भागीरथी सिंह, देवेंद्र यादव, नीरू सिंह, आकांक्षा पासवान, राकेश शुक्ला, अरविंद नाथ पांडेय, कानूनगो, आर.आर.के., लेखपाल, खतौनी प्रभारी तथा संबंधित ऑपरेटर मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति से जिलाधिकारी को अवगत कराया।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि गांवों में नियमित भ्रमण कर योजनाओं की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाए। यदि किसी किसान या नागरिक को किसी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है तो उसे स्पष्ट कारण बताया जाए और समाधान के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाए। उन्होंने कहा कि आम जनता को बार-बार तहसील के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए ग्राम स्तर पर ही समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जाए।
उन्होंने लेखपालों को गांवों में चौपाल आयोजित कर किसानों को योजनाओं की जानकारी देने का भी निर्देश दिया। किसान सम्मान निधि, फॉर्मर रजिस्ट्री, किसान दुर्घटना बीमा तथा अन्य योजनाओं की पात्रता और प्रक्रिया के संबंध में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
बैठक के अंत में डीएम दीपक मीणा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की मंशा है कि किसान सम्मान और सुरक्षा दोनों दृष्टि से सशक्त हों। योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक समय से पहुंचे, यही प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई तय है।
सदर तहसील सभागार में आयोजित इस गंभीर समीक्षा बैठक से यह स्पष्ट संदेश गया कि जिला प्रशासन किसान हितों को लेकर पूरी तरह सतर्क और प्रतिबद्ध है। गांव स्तर पर सटीक डाटा, पारदर्शी प्रक्रिया और समयबद्ध कार्रवाई के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र किसान सम्मान निधि, फॉर्मर रजिस्ट्री या किसान दुर्घटना बीमा जैसी योजनाओं से वंचित न रहे।
