
गोरखपुर। युवा चेतना समिति द्वारा आयोजित 25वें स्वर्ण पदक सम्मान समारोह का द्वितीय सत्र कला, संगीत और सांस्कृतिक चेतना का ऐसा भव्य उत्सव बनकर उभरा, जिसने उपस्थित जनसमूह को देर तक भाव-विभोर बनाए रखा। गोकुल अतिथि भवन का सभागार जब सुरों, रागों और लोकधुनों से आलोकित हुआ, तो यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि परंपरा, साधना और सृजनशीलता का जीवंत उत्सव प्रतीत हुआ।
द्वितीय सत्र की मुख्य अतिथि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. पूनम टंडन रहीं, जबकि अध्यक्षता पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक रणविजय सिंह ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में शोभित मोहन दास की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की प्रतिष्ठा को और बढ़ाया।
सांस्कृतिक संध्या का मंगलारंभ डॉ. स्मिता मोदी द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण भजन से हुआ। उनकी मधुर स्वर लहरियों ने पूरे सभागार को भक्तिमय वातावरण में डुबो दिया और कार्यक्रम को एक गरिमामयी शुरुआत प्रदान की।
इसके पश्चात प्रसिद्ध बांसुरी वादक रानू जानसन ने अपनी सुरमयी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बांसुरी की कोमल तान ने वातावरण में अद्भुत शांति और तन्मयता घोल दी।
मशहूर सितार वादक एन. डी. शर्मा ने शास्त्रीय संगीत की गहराई और सौंदर्य का उत्कृष्ट परिचय देते हुए ऐसी प्रस्तुति दी, जिसने संगीत प्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया।
लोकधुनों की महक बिखेरते हुए लोकगीत गायक रामदास ने जब मंच संभाला, तो पूरा सभागार पूर्वांचल की माटी की सुगंध से सराबोर हो उठा। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को अपनी लोकपरंपराओं से जोड़ते हुए आत्मीयता का वातावरण निर्मित किया।
विशेष उल्लेखनीय यह रहा कि सभी प्रस्तुतियां एकल रहीं, जिससे प्रत्येक कलाकार की साधना, प्रतिभा और कलात्मक व्यक्तित्व पूरी गरिमा के साथ उभरकर सामने आया।
अपने संबोधन में डॉ. पूनम टंडन ने कहा कि संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होती है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और मूल्यों से जोड़ते हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में रणविजय सिंह ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और रचनात्मकता को नई दिशा देते हैं।
इस अवसर पर युवा चेतना समिति के संरक्षक डॉ. शिवशरण दास, डॉ. विमल कुमार मोदी तथा अध्यक्ष मांधाता सिंह की सक्रिय उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम में शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें हर्षवर्धन शाही, प्रेम दत्त कालिया, रामपाल सिंह, सैम कुट्टी, मनोज कुमार सिंह, आशुतोष कुमार ओझा, मनोज कुमार पांडे, विजय आनंद सिंह, आलोक कुमार सिंह, राजेश कुमार पांडे, राहुल दुबे, राकेश प्रताप चंद, ई. राकेश कुमार सिंह, अशोक गुप्ता, सतीश राय (अध्यक्ष — रोटरी क्लब), प्रवीण आर्य सिंह, प्रेम तत्काल्या, श्याम कुट्टी, डॉ. पी. पी. गुप्ता, रीता मिश्रा, विभांशु सिंह, बिपाशा सिंह, किरण सिंह, रतन प्रिया, शीला झा, डॉ. हर्ष कुमार सिन्हा, महेश गर्ग तथा सुधांशु चंद्रा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे
