
गोरखपुर ! आज़ पर्यावरण दिवस पर गीडा क्षेत्र में सेक्टर सात में आयोजित ‘हर घर नीम ‘ कार्यक्रम में बोलते हुए पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी डा आलोक पाण्डेय ने कहा कि
नीम पारिस्थितिकी दृष्टि से बहुत खास है। यह प्रदूषण के बहुत उच्च स्तर को सहन कर सकता है और इसके अधिकांश पत्ते गिरने पर भी ठीक होने की क्षमता रखते है। नीम के पेड़ों में कणिकामय धूल, CO2, सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड जैसे प्रदूषकों को अवशोषित करने की क्षमता बहुत अलग-अलग होती है । 1996 में राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान, भारत द्वारा नई दिल्ली में स्थानों पर किए गए एक अध्ययन से पता चला कि नीम का पेड़ औद्योगिक स्थानों में शहरी प्रदूषण की जाँच के लिए सबसे उपयुक्त प्रजातियों में से एक है और उच्च वायु प्रदूषण के ज्ञात इतिहास वाले हॉट स्पॉट में ग्रीन बेल्ट विकास की क्षमता है। ईसा से तीसरी शताब्दी पूर्व सम्राट अशोक ने आदेश दिया था कि नीम को अन्य बारहमासी पौधों, टैमारिंडस इंडिका और मधुका लैटिफोलिया के साथ सड़कों और राजमार्गों के किनारे लगाया जाए। इस अवसर पर मान्यता प्राप्त पत्रकार दिनेश चन्द्र पाण्डेय ने कहा कि हम सरकार से अपील करतें हैं कि नीम के पौधे हर घर में लगवायें। एलर्ट एक्शन सोसाइटी लोगों के घर जाकर , कार्यालयों में सम्पर्क करके उन्हें नीम के पौधे भेंट कर रही है ! इन पौधों की सुरक्षा की विधि समझा रही है यह बहुत बड़ा परोपकार है !
औद्योगिक क्षेत्र में नीम की महत्ता को बताते हुए सोसाइटी के सदस्यों ने व्यापक जन सम्पर्क किया ! संस्था सचिव अमित कुमार मिश्र गम्भीर ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्रो में सड़कों , परिसर में नीम के पौधे अधिक से अधिक लगायें जायें संस्था इसके लिए सतत क्रम जारी रखें है । संस्था अध्यक्ष धनंजय शुक्ल ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश में १० करोड़ नीम के पौधे ही शेष हैं जबकि सरकार का लक्ष्य है १४० करोड़ नीम के पौधे लगाना ! यह रोग प्रतिरोधी, सनातनी शुभ पौधा है ! घरेलू उपयोग की हजारों खूबियां इस पौधे में हैं ! हर घर नीम पहुंचाना संस्था का लक्ष्य है ! कार्यक्रम में प्रणय तिवारी, अब्दुल जदीद, साधना मिश्रा, होरी लाल , खुशबू , राजशेखर त्रिपाठी, कन्हैया लाल, हमीद , डा अजय पाठक , शोभा सिंह , रंजीत निषाद, संतोष यादव एडवोकेट, बेचूं राव , जानकी , सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहे।
