आराम करने के लिए सोए, सोए ही रह गए

गोरखपुर । विकास खण्ड बड़हल गंज के खोहिया पट्टी गांव निवासी 97 वर्षीय सत्यनारायण पाण्डेय अपने दो पुत्रवधू विद्यावती देवी स्वेता पांडेय व अपने छोटे भाई की धर्म पत्नी सुभावती देवी सहित गांव के तीस लोगों के साथ परिवहन निगम की बस को बुक करके लोगो के साथ मौनी अमावस्या के चार दिन पूर्व 25 जनवरी को घर से प्रस्थान किये। वहाँ सकुशल पहुँचने के बाद चार दिन संगम महाकुंभ में डुबकी लगाएं।
मौनी अमावस्या के दिन साथ गए लोगो के साथ सुबह 2 बजे स्नान करके अपने बेड़ा पर पहुँचे और आराम किये ।
दोपहर एक बजे के आसपास वापसी के लिए बुजुर्ग अवस्था 10 किमी पैदल चलकर रात्रि 8 बजे झूसी बस स्टैंड पहुँचकर सभी लोगो के साथ भोजन करके आराम करने के लिए सोए गए ।
जब बस बैठने के लिए उनकी बहुओं ने जगाया तो देखी की बाबा की सांस थम चुकी थी । उस समय रात्रि 11 बजकर 40 मिनट हो रहा था । बहुओं ने साथ गए लोगो को बताई तो लोगों ने उनके घर बाबा के निधन की सूचना दिया । बाबा के निधन की सूचना पर् उनके प्रपौत्र रोहित पाण्डेय विहारी पाण्डेय गए वहाँ पहुँचकर साथ के लोगो के काफी दिक्कतें झेलते हुए रसूलाबाद गंगा तट पर अंतिम संस्कार कराया । सूचना के बाद दिल्ली से पहुचे उनके लड़के शेषनाथ पांडेय ने मुखाग्नि दिया ।
बड़ी दिलचस्प की बात यह हैं कि घर से जाते समय सत्यनारायण पांडेय ने घर के लोगों पैसा मांगते हुए कहा कि हर यह मेरा अंतिम संगम स्नान है । अभी तक कोई स्नान छुटा नही हैं अब घर नही आएंगे । प्रपौत्र रोहित पांडेय ने बताया कि सत्यनारायण पांडेय अपनी छठवीं पीढ़ी को देख कर गए संयुक्त परिवार का एक उदाहरण हैं ।बाबा के निधन पर क्षेत्र के लोगो मे चर्चा है कि पांडेय जी निश्छल प्रवित्ति के थे।प्रयाग राज के संगम क्षेत्र में मुक्ति मिली।
