बहुरंगी साझा काव्य-संकलन में समाज, संस्कृति, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं को मिला सशक्त स्वर
गोरखपुर। शिवोहम प्रकाशन, कोलकाता/हैदराबाद द्वारा प्रकाशित ‘सृजन प्रवाह 2026’ साझा काव्य-संकलन को पाठकों एवं पुस्तक प्रेमियों की सराहना मिल रही है। यह बहुरंगी काव्य-संकलन विभिन्न रचनाकारों की संवेदनाओं, विचारों और जीवनानुभवों को एक साझा साहित्यिक मंच प्रदान करता है। संकलन में शामिल रचनाएं समाज, संस्कृति, प्रकृति, रिश्तों और मानवीय भावनाओं के विभिन्न पहलुओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
पुस्तक की प्रमुख विशेषता इसकी विषय-विविधता है। कहीं मां के प्रति वात्सल्य, श्रद्धा और सम्मान की अभिव्यक्ति दिखाई देती है, तो कहीं मजदूर वर्ग के संघर्ष और पीड़ा को शब्द दिए गए हैं। कई रचनाओं में नारी के अस्तित्व, अधिकार और आत्मसम्मान से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। वहीं प्रकृति संरक्षण, देशभक्ति, आध्यात्मिकता और सामाजिक सरोकारों को भी रचनाकारों ने अपनी लेखनी के माध्यम से स्वर दिया है।
‘मजदूर’ जैसी रचनाएं श्रमजीवी वर्ग की कठिनाइयों और संघर्ष को सामने लाती हैं, जबकि ‘मां’ जैसी रचनाओं में ममता, त्याग और संस्कारों की भावपूर्ण अनुभूति देखने को मिलती है। इन रचनाओं के माध्यम से पाठक जीवन के विभिन्न अनुभवों और सामाजिक वास्तविकताओं से रूबरू होता है।
नारी विमर्श को भी मिली प्रमुखता
संकलन में नारी-विमर्श भी प्रभावशाली रूप से उभरकर सामने आया है। ‘स्त्री’, ‘गृहिणी’ और ‘नारी आरक्षण’ जैसी रचनाओं के माध्यम से महिलाओं के त्याग, संघर्ष, सामाजिक अपेक्षाओं, अधिकार और आत्मसम्मान से जुड़े मुद्दों को अभिव्यक्ति दी गई है। ये रचनाएं समाज में महिलाओं की भूमिका और उनके सामने मौजूद विभिन्न प्रश्नों पर विचार करने के लिए पाठकों को प्रेरित करती हैं।
युवा पीढ़ी को सकारात्मक सोच की प्रेरणा देगा : गोविन्द प्रताप मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी गोविन्द प्रताप मिश्र ने पुस्तक पढ़ने के बाद कहा कि ‘सृजन प्रवाह 2026’ एक बहुरंगी साझा काव्य-संकलन है, जिसमें विभिन्न रचनाकारों की भावनाओं और विचारों का सुंदर समावेश है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक व्यापक स्तर पर पाठकों का ध्यान आकर्षित करने में सक्षम है और युवा पीढ़ी की नकारात्मक सोच को बदलकर उसे सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ लोगों की सोच को प्रभावित करने और संवेदनशीलता विकसित करने का सशक्त माध्यम भी है। ऐसे साहित्यिक प्रयास नई पीढ़ी को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समग्र रूप से ‘सृजन प्रवाह 2026’ केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि अनेक हृदयों की भावनाओं, अनुभवों और विचारों से निर्मित एक साहित्यिक प्रवाह है। यह संकलन पाठकों को संवेदनशील बनाने, सामाजिक प्रश्नों पर चिंतन करने और जीवन के विभिन्न पक्षों को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करता है। इसमें नवोदित और अनुभवी रचनाकारों की सृजनात्मक ऊर्जा का सुंदर संगम देखने को मिलता है। भारतीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चेतना को आगे बढ़ाने की दिशा में यह संकलन अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज कराता है।

